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आतिशबाजी में सतर्कता, आग से सुरक्षा

अलीगढ़ मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकेश कुमार ने दीपावली पर्व के दृष्टिगत जनसामान्य से अपील की है कि त्योहार को उल्लासपूर्वक मनाएं, परंतु आतिशबाजी करते समय पूरी सावधानी बरतें। थोड़ी सी असावधानी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। अतः “Know Fire – No Fire” के संदेश को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति आग से सुरक्षा के उपाय अपनाए।

आतिशबाजी विक्रय व प्रयोग से संबंधित सावधानियां:

उन्होंने बताया कि विस्फोटक नियम 2008 के नियम 84 के अनुसार आतिशबाजी को केवल अज्वलनशील सामग्री से बने बंद व सुरक्षित शेड में ही रखा जाए ताकि अप्राधिकृत व्यक्तियों की पहुँच रोकी जा सके। प्रत्येक शेड एक-दूसरे से कम से कम तीन मीटर व सुरक्षित कार्य स्थल से पचास मीटर की दूरी पर हो। आतिशबाजी के शेडों के अंदर या आस-पास खुली लौ, तेल या गैस के लैम्प का प्रयोग न किया जाए।

विद्युत बत्तियों का उपयोग करते समय उन्हें दीवार या छत पर फिक्स करें और प्रत्येक पंक्ति के लिए एक मुख्य स्विच की व्यवस्था रखें। किसी भी आतिशबाजी शेड के पचास मीटर के भीतर आतिशबाजी का प्रदर्शन निषिद्ध है। साथ ही किसी समूह में पचास से अधिक दुकानें अनुज्ञात नहीं होंगी। सभी विक्रय स्थलों पर स्थानीय भाषा में “विस्फोटक या खतरनाक पदार्थ” का चेतावनी बोर्ड प्रदर्शित करना अनिवार्य है।

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प्रतिबंधित आतिशबाजी:

एण्टीमनी, लीथियम, आर्सेनिक, लेड, स्ट्रॉन्शियम क्रोमेट या बेरियम साल्ट जैसे हानिकारक रसायनों से बनी आतिशबाजी, खुले या श्रृंखलाबद्ध पटाखों (लड़ी) का विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित है।

अन्य निर्देश:

ऽ 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को आतिशबाजी तभी बेची जाए जब उनके साथ कोई वयस्क हो।

ऽ दुकानों में भीड़ न लगने दें, ताकि हैंडलिंग के लिए पर्याप्त स्थान रहे।

ऽ दुकान में किसी भी प्रकार की खुली आतिशबाजी न रखें।

ऽ धूम्रपान, मोमबत्ती, लालटेन या किसी भी प्रकार के आग के स्रोत को पास न आने दें।

ऽ प्रत्येक दुकान में अग्निशामक यंत्र, पानी व बालू की बाल्टी अवश्य रखें।

क्या करें:

ऽ केवल लाइसेंसधारक व विश्वसनीय विक्रेता से ही आतिशबाजी खरीदें।

ऽ आतिशबाजी का प्रयोग किसी वयस्क के निर्देशन में करें।

ऽ पैकेट पर अंकित सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

ऽ सुलगाने के लिए अगरबत्ती या मोमबत्ती का प्रयोग करें।

ऽ अधजली आतिशबाजी को पानी में भिगोकर ही निस्तारित करें।

ऽ सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशानुसार ग्रीन क्रैकर्स का ही उपयोग करें

क्या न करें:

ऽ श्रृंखलाबद्ध आतिशबाजी या अत्यधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले पटाखों का प्रयोग न करें।

ऽ रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच आतिशबाजी न करें।

ऽ हाथ में पकड़कर पटाखे न जलाएं।

ऽ घरों या बंद स्थानों के भीतर आतिशबाजी न करें।

ऽ पेड़ों, तारों या इमारतों के पास हवाई आतिशबाजी न छोड़ें।

ऽ खराब पटाखे को पुनः जलाने की कोशिश न करें।

ऽ नकली व अवैध पटाखों से बचें।

ऽ बच्चों को अकेले पटाखे जलाने न दें

संदेश:

सुरक्षा ही उत्सव का सच्चा आनंद है। थोड़ी सी सावधानी से दीपावली न केवल प्रकाश और खुशियों का पर्व बनेगी बल्कि सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल भी रहेगी।

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